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Hindi Essay On Mitrata Ka Mahatva In Hindi

Friendship Day (Mitrata or Dosti) Mahatva Essay Dohe in hindi मेरे मन मैं फ्रेंडशिप को लेकर जो भी भाव हैं, मैंने उनका समावेश इसमें किया हैं, अगर आप भी इससे सहमत हैं तो शेयर जरुर करें |

मित्रता दोस्ती फ्रेंडशिप का महत्व निबंध दोहे

Friendship Day Mahatva Essay Dohe in hindi

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं और साथ ही उसमे विचारों को व्यक्त करने एवम भावनाओं को महसूस करने की शक्ति होती हैं | इसी कारण मनुष्य अकेला नहीं रह सकता | एक मनुष्य दुसरे मनुष्य अथवा किसी अन्य प्राणी की तरफ आकृषित होता हैं | उसे भावनात्मक रूप से अपना समझाता हैं बिना किसी रक्त संबंध के अपने दुःख सुख उससे बाटता हैं और सदैव उसकी मदद करता हैं | ऐसे ही संबंध को दोस्ती अथवा मित्रता का संबंध कहा जाता हैं |

दोस्ती मित्रता के प्रकार (Type of Friendship)

जब हम छोटे से होते हैं |खेलने के लिए हमें हमेशा अपनी उम्र के किसी दोस्त की जरुरत होती हैं | कॉलोनी में हमें कई तरह के मित्र मिलते हैं पर उन में भी कुछ हमें खास लगने लगते हैं, जिसके साथ हमें खेलना अच्छा लगता हैं | जिससे हम अपने खिलोने शेयर कर सकते हैं, जिसे हमेशा हम अपने साथ देखना चाहते हैं | ये वो मित्रता हैं जिसका पहला और आखरी मतलब हैं खेल | बस इस उम्र की मित्रता में मनुष्य को खेलना ही सबसे अधिक प्रिय और महत्वपूर्ण काम लगता हैं और उनके इस कार्य में जो उनके सबसे अच्छे सहभागी हैं वे उसके खास मित्र बन जाते हैं |

  • स्कूल,कॉलेज एवम ऑफिस की मित्रता :

बच्चा बड़ा होता हैं | यह समय उसकी लाइफ का सबसे सुंदर समय होता हैं, जिसमे वो जिंदगी का सबसे अच्छा वक्त बिताता हैं, लेकिन यही वो समय होता हैं जब एक बच्चा अपना भविष्य बनाता हैं या बिगाड़ता हैं | इस समय दोस्तों का बच्चे की मानसिकता पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता हैं | अच्छी एवम बुरी संगति उस बच्चे के पुरे जीवन को प्रभावित करती हैं | स्कूल एवम कॉलेज के दौर में एक बच्चे को दोस्ती की सबसे ज्यादा जरुरत होती हैं | पढाई के लिए, मनोरंजन के लिए यहाँ तक की मन में उठ रहे विचारों के लिए उसे एक हम उम्र साथी की जरुरत होती हैं |

ऑफिसियल लाइफ में व्यक्ति को मित्रों की बहुत आवश्यक्ता होती हैं | व्यस्त शीड्यूल के कारण मनुष्य मानसिक रूप से बहुत थक जाता हैं | ऐसे में मनुष्य को मित्र ही इस थकावट से बाहर निकालता हैं |

जरुरी नहीं दोस्ती केवल स्कूल,कॉलेज या गली मोहल्ले के हम उम्र के लोगो के बीच ही होती हैं | आज के समय में सबसे करीबी दोस्त माता, पिता, दादा दादी एवम भाई बहन ही होते हैं | जब ये रिश्ते अपनी उम्र के अनुभव को छोड़ अपने बच्चो के साथ उनके जैसे बन जाते हैं | उन्हें खेल खेल में सही गलत समझाते हैं तब ये रिश्ते ही सबसे बेहतर दोस्त कहलाते हैं | आज क्राइम इस कदर बढ़ रहा हैं कि बाहरी दुनियाँ पर व्यक्ति कम ही विश्वास कर पाता हैं ऐसे में दोस्त शब्द के मायने घर में ही तलाशने पड़ते हैं | रक्त संबंध से बने मित्रता के रिश्ते आज के समय में ज्यादा कारगर सिद्ध होते हैं |

  • जानवरों एवम पशु पक्षियों से मित्रता :

मनुष्य केवल मनुष्य के मित्रता करे यह जरुरी नहीं | कई लोगो को पालतू जानवरों से बहुत अधिक प्रेम होता हैं | वे अपने दिल की सभी बाते अपने पालतू जानवर से करते हैं |भले ही उस जानवर से उन्हें कोई उत्तर प्राप्त नही होता लेकिन फिर भी वे उनसे बात करके स्वयं को हल्का महसूस करते हैं |

इस प्रकार यह थे मित्रता अथवा दोस्ती के प्रकार जो आमतौर पर हमारे सामने होते हैं और जो हमें इस सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाते हैं |

मित्रता फ्रेंडशिप का महत्व  (Friendship Mitrata Dosti Mahatva)

मित्रता का महत्व बहुत बड़ा हैं | जब भी व्यक्ति किसी अन्य के साथ स्वयं को परिपूर्ण समझे | उसके साथ उसकी तकलीफों को अपना समझे | अपने गम उसे कह सके | भले ही दोनों में न रक्त संबंध हो, न जातीय संबंध और नहीं इंसानी,सजीवता का संबंध लेकिन फिर भी वो भावनात्मक दृष्टि से उससे जुड़ा हुआ हो यही मित्रता का अर्थ हैं | जैसे :

एक राइटर को अपने कलम अपनी डायरी से भी वैसा ही लगाव होता हैं जैसे किसी मित्र से | बचपन में छोटे बच्चो को अपने खिलोने से बहुत लगाव होता हैं | वे उनसे बाते करते हैं लड़ते हैं जैसे किसी मित्र के साथ उनका व्यवहार होता हैं ,वैसा ही वो अपने खिलोनो के साथ करते हैं | वही कई व्यक्ति ईश्वर से मित्रता करते हैं | उनसे अपने दिल की आपबीती कहते हैं | अपने सुख दुःख कह कर अपना मन हल्का करते हैं | ईश्वर में आस्था ही ईश्वर से मित्रता कहलाती हैं |

इन सब बातों का मतलब यही हैं कि मनुष्य एक ऐसा प्राणी हैं जो अकेला नहीं रह सकता | उसे अपने दिल की बात कहने के लिए किसी न किसी साथी की जरुरत होती हैं फिर चाहे वो कोई इन्सान हो, जानवर हो या कोई निर्जीव सी वस्तु या फिर भगवान |

मित्रता दोस्ती पर दोहे ( Mitrata Dosti Par Dohe)

Mitrata dohe 1:

मथत मथत माखन रही, दही मही बिलगाव

रहिमन सोई मीत हैं, भीर परे ठहराय

अर्थात : दही को मथते- मथते उसके उपर माखन आ जाता हैं और दही छांछ में विलय हो जाता हैं इस प्रकार रहीम कवी कहते हैं कि एक मित्र भी इसी तरह विप्प्ती में अपने मित्र के साथ खड़ा होता हैं और माखन रूप समस्या को अपने मित्र के साथ अपने सर पर भी धारण करता हैं अर्थता जो विपत्ति में साथ देते हैं वही सच्चे मित्र कहलाते हैं |

Mitrata dohe 2 :
गिरिये परवत शिखर ते, परिये धरनि मंझार

मूरख मित्र न कीजिए, बूडो काली धार

अर्थात लगे तो ऊंचे पहाड़ से गिर जाओं भले किसी बीच राह पर फंस जाओं किसी भी तरह की विप्पति क्यूँ न हो इसमें किसी असंगत मुर्ख दोस्त की सहायता नहीं लेनी चाहिये यह एक नयी विप्पत्ति के समान होगा | अर्थात बुरी संगती में दोस्ती सदैव विनाश का कारण बनती हैं |

उपरोक्त दो दोहे जो कवी रहीम एवम कबीर ने अपने मुख से कहे मित्र के सच्चे एवम झूठे व्यक्तित्व को बताते हैं जो मित्र विकट परिस्थिती में आपने मुँह फैर ले वो आपका मित्र नहीं हो सकता वो केवल आपका उपहास करने वाला मौका परस्त व्यक्ति हैं ऐसे दोस्त हमेशा हमें कठिन परेशानी में देख खुश होते हैं |

  • वर्तमान एवम एतिहासिक मित्रता में अंतर :

आज के कलयुगी समय में मित्रता की परिभाषा बहुत भिन्न हैं पहले दोस्ती होने पर मरते दम तक निभाई जाती थी और आज एक माह दो माह या एक नौकरी से दूसरी नौकरी तक ही दोस्ती रहती हैं | दोस्ती में विश्वासघात तो मानों इस कलयुग में आम बात हैं | वही इतिहास दोस्ती के उदाहरनो से भरा हुआ हैं | पहले के समय में मनुष्य में एका होता था |मनुष्य ज्यादा सामाजिक था इसलिए मित्रता को सर्वोपरी रखता था इसलिए ही उस समय धोखाधड़ी जैसे अपराध नहीं होते थे | दोस्ती के कई उदाहरण तो पौराणिक काल में भी मिलते हैं जैसे कृष्ण सुदामा की दोस्ती, राम एवम सुग्रीव की दोस्ती अथवा पृथ्वी राज चौहान और चन्द्रवरदायी की मित्रता या फिर महा राणा प्रताप और उनके घोड़े चेतक की मित्रता | यह सभी ऐसे प्रमाण हैं जो आज हमें मित्रता का सही महत्व मित्रता का अर्थ सिखाते हैं |

इस सभी बातों से यही समझ आता हैं मनुष्य किसी भी दौर में चले जाये उसे मित्र की जरुरत हमेशा रहेगी | एक सामाजिक प्राणी के तौर पर वो मित्र शब्द के बिना अधुरा हैं | कहते हैं न सुख बाटने से बढ़ता हैं और दुःख बांटने से कम होता हैं | इस पंक्ति को चरितार्थ करने के लिए हमें एक मित्र की हमेशा ही जरुरत होती हैं |

Mitrata एक अनमोल बंधन हैं जो जीवन में होना हमारी जरुरत भी हैं और हमारा हक़ भी | अतः हमेशा स्वयं को किसी न किसी दोस्ती के बंधन में जरुर बंधना चाहिये |यही एक सामाजिक जीवन का सत्य हैं समाज में कोई बिना किसी साथी, दोस्त, सखा के बिना नहीं रह सकता |

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Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं

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मित्रता सगा न होते हुए भी सगे जैसा संबंध होता है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति के साथ किसी को भी हो सकता है साथ ही ये किसी अन्य के अलावा अपनों में भी गहरी मित्रता का संबंध संभव है। दोस्ती के इसी महत्व और गहराई को समझाने के लिये स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और विद्यार्थियों के लिये हम यहाँ पर कुछ सीधे और सरल भाषा के साथ ही विभिन्न शब्द सीमाओं में निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। इसका उपयोग विद्यार्थी किसी भी स्कूली परीक्षाओं या प्रतियोगिताओं में कर सकते हैं।

दोस्ती पर निबंध (फ्रेंडशिप एस्से)

You can get below some essays on Friendship  in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

दोस्ती पर निबंध 1 (100 शब्द)

दुनिया में कहीं भी रह रहे दो या दो से अधिक लोगों के बीच दोस्ती एक भरोसेमंद और निष्ठावान रिश्ता है। हम अपनी पूरी जिन्दगी अकेले नहीं जी सकते और खुशी से जीने के लिये किसी भरोसेमंद साथी की ज़रुरत है जिसे दोस्त कहते हैं। दोस्ती एक अन्तरंग रिश्ता होता है जिसपर हमेशा के लिये भरोसा किया जा सकता है। ये उम्र, लिंग और व्यक्ति के पद पर सीमित नहीं होता अर्थात् मित्रता किसी भी आयु वर्ग के पुरुष की पुरुष से, महिला की महिला से या इंसान की जानवर के बीच हो सकती है।

हालांकि, आमतौर पर ये एक आयु वर्ग के व्यक्तियों के बीच में बिना किसी लिंग और पद के भेदभाव के संभव है। मित्रता एक या अलग जुनून, भावना या विचार के व्यक्तियों के साथ विकसित हो सकती है।

दोस्ती पर निबंध 2 (150 शब्द)

जीवन में बहुत महत्वपूर्ण वस्तुओं के होने के बावजूद भी एक इंसान के जीवन में मित्रता एक बहुत ही मूल्यवान रिश्ता है। कोई भी जीवन को पूरी तरह से संतोषजनक नहीं बीता सकता अगर उसके पास भरोसेमंद दोस्ती नहीं है। हरेक को जीवन की अच्छी-बुरी यादें, असहनीय घटना और खुशी के पल को साझा करने के लिये एक अच्छे और निष्ठावान मित्र की ज़रुरत होती है। सभी के जीने के लिये एक अच्छे और संतुलित मानव अन्योन्यक्रिया की बहुत आवश्यकता होती है।

अच्छे दोस्त एक-दूसरे की संवेदनाओं और भावनाओं को बाँटते हैं जो स्वस्थ होने और मानसिक संतुष्ठि का एहसास लाता है। एक मित्र ऐसा इंसान है जिसे कोई गहराई से जान सकता है, हमेशा पसंद और भरोसा कर सकता है। दोस्ती में शामिल दो व्यक्तियों के स्वाभाव में कुछ एकरुपता होने के बावजूद, उनके पास कुछ अलग विशेषताएँ होती है लेकिन बिना एक-दूसरे के अनोखेपन को बदले उन्हें एक-दूसरे की ज़रुरत होती है। आमतौर पर, बिना आलोचना के दोस्त एक-दूसरे को प्रेरित करते हैं लेकिन कई बार कुछ सकारात्मक बदलाव लाने के लिये दोस्त अपने दूसरे मित्र की बुराई भी करता है।

दोस्ती पर निबंध 3 (200 शब्द)

इसमें शामिल हुए व्यक्ति के जीवन में एक सच्ची दोस्ती सबसे बहुमूल्य उपहार है। अपने जीवन में एक सच्चा दोस्त पाने वाले इंसान को बहुत भाग्यशाली कहा जाता है। सच्ची मित्रता जीवन में कई प्रकार के यादगार, मीठे और खुशनुमा अनुभव देती है। किसी के जीवन में मित्रता सबसे बहुमूल्य संपत्ति है जिसे कोई कभी खोना नही चाहेगा। जीवन में बिना किसी असफलता के सफलता की ओर इसमें शामिल दो या दो से अधिक व्यक्तियों को सच्ची दोस्ती की ओर ले जाता है। एक अच्छे दोस्त की तलाश आसान काम नहीं है, एक-दूसरे से गलतफहमी के कारण कई बार हम सफल होते हैं और कई बार असफल।

दोस्ती प्यार का एक समर्पित एहसास है जिससे अपने जीवन के बारे में हम कुछ भी साझा कर सकते हैं और हमेशा एक-दूसरे का ध्यान रखते हैं। एक मित्र वो होता है जो बिना किसी लाग-लपेट के दूसरों को समझता और सराहना करता है। सच्चे दोस्त कभी एक-दूसरे के लिये लालची नहीं बनते, वो एक-दूसरे को उनके जीवन में कुछ बेहतर देना चाहते हैं। मित्रता के बीच में कोई दीवार या उम्र का भेदभाव, जाति, नस्ल, धर्म या लिंग नहीं आता। वो एक –दूसरे की सच्चाई जानते हैं और संतुष्टिपूर्वक एक-दूसरे की मदद करते हैं।

मानव एक सामाजिक प्राणी है और अकेले नहीं जी सकता; किसी को भी अपने दुख-सुख को बाँटने के लिये किसी की ज़रुरत पड़ती है। आमतौर पर, एक सफल मित्रता एक बराबर उम्र, चरित्र और पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के बीच होती है। दोस्त एक-दूसरे के लिये निष्ठावान सहायक है जो बिना किसी लक्ष्य के जीवन के बुरे समय में दोस्त की मदद करता है।


 

दोस्ती पर निबंध 4 (250 शब्द)

दो या दो से अधिक लोगों के बीच में मित्रता एक दैवीय रिश्ता है। दोस्ती का दूसरा नाम ध्यान रखना और सहायता करना है। ये भरोसे, एहसास और एक-दूसरे के प्रति बराबर समझ पर आधारित है। दो या दो से अधिक सामाजिक लोगों के बीच में ये बहुत साधारण और निष्ठावान रिश्ता है। जो लोग सच्ची दोस्ती करते हैं वो बिना किसी प्रकार के लालच के दूसरे मित्र का ध्यान रखते हैं और सहायता करते हैं। परवाह और भरोसे से दिनों-दिन दोस्ती और मजबूत होने लगती है।

बिना एक दूसरे को अपना दंभ और ताकत दिखाये दोस्त एक-दूसरे पर भरोसा और सहायता करते हैं। उनको अपने दिमाग में न्याय का एहसास रहता है और जानते हैं कि किसी भी समय किसी को भी ध्यान और सहायता की ज़रुरत पड़ सकती है। लंबे समय तक दोस्ती को बनाये रखने के लिये समर्पण और भरोसे की बहुत ज़रुरत होती है। ढेर सारी मांगों और संतुष्टि की कमी की वजह से कुछ लोग दोस्ती को लंबे समय तक बनाए रखने में अक्षम होते हैं। कुछ लोग केवल अपनी जरुरतों और इच्छाओं की पूर्ति के लिये दोस्त बनाते हैं।

एक बड़ी भीड़ में एक अच्छा दोस्त ढूढंना कोयले के खदान में हीरा तलाशने के समान है। सच्चे दोस्त केवल वहीं नहीं होते जो अच्छे मौकों पर ही उपलब्ध हों बल्कि वो होते हैं जो बुरी परिस्थितियो में भी साथ खड़े रहें। हमें अपना सबसे अच्छा दोस्त चुनने में सावधान रहना चाहिये क्योंकि हम किसी से भी धोखा खा सकते हैं। जीवन में एक अच्छा साथी पाना बहुत मुश्किल कार्य है और अगर किसी को सच्चा साथी मिलता है तो उसपर प्रभु की सच्ची कृपा है। एक अच्छा मित्र हमेशा दोस्त के बुरे समय में उसकी सहायता करता है और सही राह पर चलने के लिये सलाह दिखाता है।

दोस्ती पर निबंध 5 (300 शब्द)

कड़ी मेहनत के बाद जीवन में किसी खास के लिये सबकुछ अर्पण कर देना सच्ची दोस्ती है सच्ची दोस्ती दो या दो से अधिक लोगों के बीच सच्चा रिश्ता है जहां बिना किसी माँग के भरोसा बना रहता है। कोई हमेशा परवाह, सहायता और दूसरी जरुरी चीजें देने के लिये सच्ची मित्रता में तैयार रहता है। मित्र सभी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि प्यार, देखभाल और भावनात्मक सहायता देने के द्वारा किसी जरुरतमंद इंसान को खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। दोस्ती दो या दो से अधिक लोगों के बीच में बिना किसी भी उम्र, वर्ग, लिंग, पद, नस्ल या जाति के हो सकती है। हालांकि, आमतौर पर मित्रता हम उम्र के बीच होती है।

कुछ लोग सफलतापूर्वक अपने बचपन की दोस्ती को पूरे जीवनभर लेकर चलते हैं जबकि कुछ गलतफहमी, समय की कमी या दूसरे कारणों से बीच में ही समाप्त कर देते हैं। कुछ लोगों के पास उनके किंडरगार्डेन या प्राइमरी स्तर में बहुत सारे दोस्त रहते हैं लेकिन कोई एक या शायद कोई भी इसे बाद के जीवन में आगे नहीं बढ़ाता है। कुछ लोगों के पास केवल एक या दो मित्र होते हैं जिन्हें वो बाद के अपने बुढ़ापे के दिनों में भी बहुत अच्छे से आगे लेकर चलते हैं। दोस्त परिवार के बाहर या घर का भी कोई सदस्य (पारिवारिक सदस्यों में से कोई एक) हो सकता है (पड़ोसी, रिश्तेदार आदि)।

मित्र अच्छे-बुरे दोनों प्रकार के हो सकते हैं, अच्छे दोस्त अच्छे रास्ते पर ले जाते हैं जबकि बुरा मित्र गलत राह पर ले जाता है, इसलिये हमें जीवन में दोस्त चुनते समय सावधान रहना चाहिये। बुरे दोस्त हमारे लिये बहुत बुरे साबित हो सकते हैं क्योंकि वो हमारे जीवन को पूरी तरह बरबाद करने के लिये काफी होते हैं। हमें अपनी भावनाओं (खुशी और दुख) को बांटने के लिये जीवन में कोई खास होना चाहिये, किसी से बात करने के लिये अपना अकेलापन मिटाने के लिये, किसी को दुख से निकालने के लिये हँसाने वाला हो आदि। अपने दोस्तों के अच्छे साथ में जीवन में हम कोई भी कठिन कार्य करने के लिये प्रेरित होते हैं और खुशी से बुरे समय से निकलना आसान हो जाता है।


 

दोस्ती पर निबंध 6 (400 शब्द)

दोस्ती दो लोगों के बीच में एक समर्पित रिश्ता होता है जिसमें एक-दूसरे के लिये बिना किसी इच्छा और गलतफहमी के दोनों के पास प्यार, देखभाल और लगाव होता है। आमतौर पर दोस्ती एक जैसे पसंद, एहसास, और विचारों को रखने वाले के मध्य में होती है। ऐसा माना जाता है कि मित्रता में उम्र, लिंग, पद, जाति, धर्म और संप्रदाय की कोई सीमा नहीं होती लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि आर्थिक अंतर और दूसरे भेद दोस्ती को खराब कर देते हैं। इसलिये ऐसा कहा जा सकता है कि सच्ची मित्रता एक जैसे दिमाग और समान हैसियत वाले लोगों के बीच में संभव है।

इस दुनिया में बहुत सारे दोस्त हैं जो समृद्धि के समय हमेशा एक-साथ रहते हैं लेकिन सच्ची, समझदार और भरोसेमंद दोस्ती वो है जो मित्र के बुरे समय में भी साथ रहे। हमारा बुरा समय हमें अच्छे और बुरे दोस्तों की पहचान करा देता है। स्वाभाव से हरेक को पैसे का आकर्षण होता है लेकिन सच्चे मित्र हमें कभी भी बुरा एहसास नहीं करवाते जब हमें पैसे या किसी सहायता की जरुरत होती है। हालांकि, कई बार दोस्तों से पैसा उधार लेना मित्रता को खतरे में डाल देता है। दोस्ती किसी भी समय दूसरों या खुद से प्रभावित हो सकती है इसलिये हमें इस रिश्ते में संतुलन बना कर चलना चाहिये।

कई बार मित्रता खुद के अहम् या आत्म-सम्मान के कारण टूट जाती है। सच्ची दोस्ती में उचित समझ, संतुष्टि, मदद करने की भावना तथा भरोसा होना चाहिये। सच्चे दोस्त कभी शोषण नहीं करते बल्कि जीवन में सही कार्य करने के लिये प्रोत्साहित करते हैं। लेकिन कई बार कुछ झूठे और मक्कार दोस्तों की वजह से दोस्ती का मतलब पूरी तरह से बदल जाता है जो हमेशा किसी दूसरे का गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग तुरंत दोस्त बनाना चाहते हैं और स्वार्थ की पूर्ति होते ही दोस्ती को खत्म कर देते हैं। दोस्ती के बारे में कुछ भी गलत कहना मुश्किल है लेकिन ये सत्य है कि किसी भी बेपरवाह इंसान को दोस्ती में ठगा जा सकता है। आज के दिनों में, अच्छे और बुरे लोगों के भीड़ के बीच में अच्छी दोस्ती मिलना बहुत कठिन है लेकिन अगर किसी के पास सच्चा दोस्त है तो उससे ज्यादा भाग्यशाली इस दुनिया में कोई नहीं है।

सच्ची दोस्ती इंसान की इंसान के साथ और इंसान की जानवर के साथ भी हो सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अच्छा मित्र हमारे जीवन के खराब दिनों में मदद करता है। दोस्त हमेशा हमें खतरों से बचाता है साथ ही समय से सलाह भी देता है। सच्चे दोस्त हमारे जीवन की संपत्ति के समान है क्योंकि वो हमारे दुख, दर्द और सच्चाई को हमसे बाँटते हैं और हमें खुश रखते हैं।


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